रविवार, 4 अक्टूबर 2020

हाथी का मनोबल


एक राजा के पास बहुत ही शक्तिशाली हाथी था | उस हाथी की मदद से राजा ने कई युद्ध जीते थे लेकिन समय के साथ- साथ हाथी बूढा होता जा रहा था| ऐसे में उसकी ताकत भी कम हो गई थी | धीरे-धीरे राजा ने उसे युद्ध पर ले जाना बंद कर दिया और इस कारण से उसका खाना पीना भी पहले से कम कर दिया गया | एक दिन हाथी बहुत प्यासा था | वह अपनी प्यास बुझाने के लिए महल के पास वाली झील पर गया और खूब पानी पिया |इसके बाद वह नहाने के लिए गहरे पानी में उतरने लगा लेकिन वहाँ कीचड होने के कारण वह वहाँ फस गया | जब यह बात राजा को पता लगी तो उसने सैनिकों को उसे निकालने के लिए भेजा लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी उसे निकाला नहीं जा सका | ऐसे में राजा चिंतित हो गया! तभी उसके मंत्री ने उसे एक सुझाव दिया |सभी सैनिकों को युद्ध के कपडे पहनाएँ गए और हाथी की तरफ बढने को कहा गया | युद्ध भूमि जैसे नगाडे भी बजने लगे | हाथी को लगा कि दुश्मन की सेना उसकी ओर बढ़ रही है | उसका सोया हुआ मनोबल जाग उठा और वह पूरी जोश के साथ आगे बढा | देखते ही देखते वह कीचड वाले पानी से स्वयं ही बाहर आ गया |इस तरह  मंत्री द्वारा बताई गई तरकीब काम कर गई |

सीखः मनोबल और जोश के साथ आप जो चाहे प्राप्त कर सकते है|


रविवार, 27 सितंबर 2020

खरगोश का हुनर

 


एक खरगोश को खरगोशों की स्कूल में भर्ती किया गया, पर उसमें एक खास बात थी कि वह दूसरों खरगोशों की तुलना में बढ़िया कूदता था, लेकिन तैर नहीं पाता था| साल के अंत में उसे कूदने के लिए बढ़िया अंक मिले लेकिन वह तैराकी में फेल हो गया| क्योंकि उसे तैराकी पसंद नहीं थी और उसे तैराकी करने में बहुत दिक्कतें होती थी |पर माता-पिता को बहुत चिंता हुई | माता-पिता ने खरगोश से कहा:- कूदने के बारे में भूल जाओ,  उसमें, तो तुम अच्छे ही हो | सारा ध्यान तैराकी पर लगाओ | खरगोश ने  तैराकी  की तरफ  ध्यान बढ़ा दिया और कूदना बिल्कुल छोड़ दिया | उन्होंने  खरगोश की तैराकी की कोचिंग भी करवा दी | बताइए आगे क्या हुआ होगा?  मैं ही बता देता हूं | खरगोश कूदने के हुनर में भी पीछे रह गया,  जहां तक, तैराकी का सवाल है; क्या आपने कभी किसी खरगोश को तैरते हुए देखा है ?


सीख:- सबसे पहले हमें अपने मजबूत पक्षों को साथ लेकर शुरुआत करना चाहिए|  यह भी जानना जरूरी है कि हम किन बातों में अच्छे नहीं हैं, लेकिन जो हममें अच्छा है उसका आनंद जरूर उठाना चाहिए | ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि हमारी मजबूत बातें ही कमजोरियों को दूर करने के लिए ताकत बनती है | जो आपके मजबूत हुनर है उन्हें हमेशा तरासते और निखारते रहिए|

रविवार, 20 सितंबर 2020

विश्लेषण


एक बुजुर्ग दंपत्ति दशकों से साथ थे | कुछ समय से पति को लगने लगा था कि उनकी पत्नी को अच्छे से सुनाई नहीं देता है |उसने डॉक्टर से सलाह ली तो डॉक्टर बोला ' पहले जांचिए कि आपकी पत्नी की समस्या कितनी गंभीर है ? उनसे कुछ दूर खड़े होकर देखिए की उन्हें कितनी दूर से सुनाई देता है देता है देता है | ' पति घर गया और उसने डॉक्टर के बताए अनुसार 30 फीट की दूरी पर खड़े होकर पत्नी से पूछा:- 'आज खाने में क्या है? ' पति को कोई जवाब नहीं मिला | फिर उसने 20 फीट की दूरी से पूछा:- ' आज खाने में क्या है? ' फिर कोई जवाब नहीं मिला | पति ने वही सवाल 10 फीट की दूरी से दोहराया दोहराया,  लेकिन कोई जवाब नहीं मिला | पति को लगने लगा कि पत्नी की सुनाई ना देने की समस्या गंभीर हो गई है | उसे पत्नी पर दया आई | फिर  बिल्कुल पास खड़े होकर उसने पत्नी के कंधे पर हाथ हाथ रखते हुए पूछा:- ' मैं चौथी बार पूछ रहा हूं की आज खाने में क्या है ? ' पत्नी गुस्से से चिल्लाते हुए बोली:- ' मैं भी चौथी बार बता रही हूं की खिचड़ी बनाई है | ' 


सीख:- कई बार समस्याएं  दूसरों में नहीं,  स्वयं में भी हो सकती है | समस्याओं का सही विश्लेषण करना जरूरी है  | 

रविवार, 6 सितंबर 2020

सुनहरा घर



एक पहाड़ी पर एक फार्म हाउस में एक बच्चा रहता था | रोज उसके पिता भेड़ चराने जाते और बच्चा सुबह एक काम जरुर करता | अपने घर की खिड़कियों से दूर बने एक दूसरे घर को देखा करता | उस घर की खिड़कियां सुनहरी थी | वह कहता:- मैं वहां जरूर जाऊंगा | एक दिन  उसने अपने पिता से कहा :- आज मैं भेड़ चराने जाऊंगा आप घर पर रहना  | बच्चे को इसी दिन का इंतजार था | और वह भेड़ों को चराते  हुए सुनहरी  खिड़कियों के घर की तरफ निकल पड़ा | चलते चलते उसे आभास हो गया था कि वह घर काफी दूर है | पहाड़ खेतों से गुजरते हुए शाम की शुरुआत तक वहां पहुंच गया पर उसे सुनहरी खिड़कियों वाला घर तो नहीं, पर पुरानी टूटी खिड़कियों वाला घर जरूर दिखा | उसने दरवाजा खटखटाया | तो उसी के उम्र का छोटा बच्चा बाहर आया | बच्चे ने दूसरे बच्चे से बड़ी उत्सुकता से पूछा:- क्यों तुमने सुनहरे खिड़कियों वाला घर देखा है ?
तब वह बच्चा उस बच्चे को अपने घर के अंदर  खिड़कियों के पास ले गया और वहां से एक घर को दिखाता है जो सुनहरा चमक रहा होता है जैसे कि वह इस नजारे को देखता है और स्तब्ध हो जाता है क्योंकि वह घर उसी का था जो सूरज की डूबती रोशनी में सुनहरा चमकता हुआ नजर आ रहा था |


जो आपके पास है वह बहुमूल्य है तुलना नहीं कीजिए खुश रहिए |

रविवार, 30 अगस्त 2020

कहानी :- प्रतियोगिता

प्रतियोगिता

एक बार सीधे पहाड़ पर चढ़ने की प्रतियोगिता हुई | प्रतियोगियों को पहाड़ पर चढ़ते देखने के लिए बहुत भीड़ जमा हो गई | हर कोई सीधी पहाड़ी को देखकर कहता ' यह तो बहुत सीधी है इस पर चढ़ना तो नामुमकिन है | '
कुछ प्रतियोगी यह सुनकर ऊपर चढ़े ही नहीं, तो कुछ थोड़ा ऊपर जाकर गिर गए और फिर प्रयास नहीं किया | उन्हें देख लोग और जोर से कहने लगे कि यह प्रतियोगिता कोई नहीं जीत सकता क्योंकि इस पहाड़ पर चढ़ना असंभव है | इससे बचे हुए प्रतियोगी भी हताश हो गए | लेकिन उन्हीं के बीच एक प्रतियोगी बार-बार गिरने पर भी कोशिश करता रहा और अंततः वह उसे सीधे पहाड़ पर चढ़ गया | उसे विजेता घोषित किया गया | वहां खड़े कुछ लोगों ने उससे पूछा कि तुमने यह असंभव काम कैसे किया ? तुम्हारी सफलता का राज क्या है ?  लेकिन उस प्रतियोगी ने किसी भी सवाल का कोई जवाब नहीं दिया | तभी पीछे से एक आवाज आई, ' अरे उससे क्या पूछते हो...... वह तो जन्म से ही कुछ सुन नहीं सकता |

सफलता पाने के लिए हताशा भरी नकारात्मक बातों को अनसुना करना ही बेहतर है |




रविवार, 23 अगस्त 2020

असफलताओं को सफलताओं में बदलना है तो इन से भी सीख सकते हैं |


बात किसी एग्जाम की हो, किसी प्रोजेक्ट की या बिज़नस की, फेल होने पर निराश और हताश होना आम है | लेकिन अगर आप हिम्मत हारे बिना वो करेंगे जो आपको पसंद है और उसमें बेहतरीन प्रदर्शन कर दिखाएंगे तो सफलता की नए रास्ते खुलेंगे | दुनिया में ऐसे कई सफल लोग हैं जिन्होंने सफल होने से पहले कई बार असफलता का सामना किया | अपने अनुभव से वे इस बात में बहुत यकीन रखते हैं की असफलता आपको सफलता के लिए तैयार करता है इसीलिए इससे डरे नहीं बल्कि सामना करें | लेखिका जे के रोलिंग भी असफलताओं पर खुलकर बात करती हैं | वे कहती हैं असफलता को गले लगाइए क्योंकि किसी चीज में फेल हुए बिना जीवन बिताना संभव ही नहीं है | कुछ ऐसे ही सोच के साथ इन सफल पर्सनालिटीज ने भी अपने स्कूल स्कोर को तवज्जो ना देकर अपने पैशन को पोषित किया और पूरी दुनिया में अपनी पहचान भी बनाई|

यह पांच हस्तियां

1. वयस्क होने के बाद भी पढ़ नहीं पाते थे टाम क्रूज |
Tom Cruise

हॉलीवुड लेजेंड टॉम क्रुज की माने तो वयस्क होने तक वे पढ़ नहीं पाते थे | इसकी वजह डिस्लेक्सिया थी | वे यह भी बताते हैं कि उन्होंने 18 स्कूल बदले | एक समय ऐसा भी था जब उन्होंने प्रीस्ट बनने के बारे में सोचा लेकिन एक टीचर के प्रोत्साहन पर हाई स्कूल के प्रोडक्शन में ऑडिशन दिया और लीड रोल अपने नाम कर लिया | यहीं से उन्होंने एक्टिंग में अपने पैशन को पहचाना और इसे करियर के तौर पर अपनाया | मिशन इंपॉसिबल और टॉप गन जैसी फिल्मों में काम कर चुके टाम क्रूज की संपत्ति आज लगभग 455 मिलियन स्टार्लिंग पाउंडस है |

2.रैपर बनने का सपना था तो पढ़ाई छोड़ी एमिनेम ने |
Eminem

एमिनेम अपने फेलियर को लेकर कई बार खुलकर बात कर चुके हैं | वे बताते हैं कि नौवीं क्लास में वे 3 बार फेल हुए और अंततः रैप सिंगर बनने के अपने सपने को पूरे करने की चाह में वे स्कूल की पढ़ाई पर फोकस नहीं कर पाए | इसकी चलते उन्होंने 17 कि उम्र में स्कूल ड्राप कर दिया | स्कूल छोड़ने के बाद एमिनेम ने इंडस्ट्री में पहचान बनाने की लिए कड़ी मेहनत की | इसी मेहनत के चलते आज भी पूरी दुनिया में रैपर के तौर पर जाने जाते हैं | आज उनकी संपत्ति की बात करें तो यह 167 मिलियन स्टार्लिंग पाउंडस है |

3.5000 बार फेल हुए लेकिन हारे नहीं डायसन | 

James Dayson

किसी एग्जाम या किसी काम में एक बार फेल होना काफी निराशाजनक होता है | 5000 बार वो फेल हुए हैं यह उनका फेलियरस् नंबर है जिनका सामना इनवेंटर व इंटरपेन्योर सर जेम्स डायसन ने अपने 15 साल के केरियर में किया | जेम्स डायसन मानती हैं कि ऐसे कई मोके आते हैं जब एक इन्वेंटर निराश होकर हार मान सकता है लेकिन मुझे मेरी हर असफलता ने सफलता के पास पहुंचाया | आज उनका तैयार किया गया बैगलैश वेक्यूम क्लीनर अमेरिका में बेस्ट सैलिंग में शामिल हैं | और आज उनकी संपत्ति 4.5 बिलियन डॉलर के पार है |

4.होमवर्क नहीं, गाना पसंद था रिहाना को |
Rihana
रिहाना को स्कूल जाना पसंद नहीं था | उनका मानना है कि जब आप गा सकते हैं, खेल सकते हैं या होमवर्क को छोड़कर कुछ भी दूसरा काम कर सकते हैं तो स्कूल जाना आपको कष्टदायक सकता है| रीरी के नाम से मशहूर इस सिंगर ने अपनी पहली रिकॉर्डिंग डील 16 की उम्र में साइन की और म्यूजिक रिहाना अंब्रेला, डायमंड्स और रुड बॉय जैसे कैई हिट स्टूडियो एलबम्स रिलीज कर चुकी है | हाल ही एक ब्यूटी ब्रांड लांच कर सफल बिजनेसमैन वुमन भी बनी |

5. स्कूल में बेवकूफ समझे जाते थे रिचर्ड ब्रैनसन |

Richard Branson

रिचर्ड ब्रैनसन बताते हैं कि उन्हें स्कूल में बेवकूफ़ स्टूडेंट के तौर पर देखा जाता था | डिस्लेक्सिया से ग्रस्त रिचर्ड ब्रैनसन को स्कूल में लर्निंग में दिक्कतों का सामना करना पड़ा | आखिरकार 16 की उम्र आते आते उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और एक स्टूडेंट मैगजीन शुरुआत की | मैगजीन को सपोर्ट करने के लिए उन्होंने मेल के जरिए रिकॉर्ड बेचने भी शुरू किए | मैगजीन तो सफल ना हो सकी लेकिन रिकॉर्ड का बिजनेस सफल हुआ और पूरी दुनिया में पहचाने जाने वाली कंपनी वर्जिन रिकॉर्ड्स में तब्दील हो गई | आज 400 कंपनियां इसमें शामिल हैं |
 📝📝...... Sourabh 

रविवार, 16 अगस्त 2020

क्या गोरापन ही सुंदरता है??? Dark Vs Fair

भारतीय लोग गोरी रंगत को पसंद करते हे यह निर्विवाद है आप मैट्रिमोनियल के विज्ञापन ही देख लीजिए |उनमें यह एक लाइन जरूर लिखी होती है सुशील सुंदर गौरवर्णी कन्या के लिए वर चाहिए या वर के लिए सुशील सुंदर गौरवर्णी कन्या चाहिए | हमारे लिए सुंदरता के मायने गोरापन ही क्यों है ? 

गौरवर्ण के प्रति इतना लगाव क्यों?


1. भारत में सदियों तक अंग्रेजों (गोरो) का राज रहा जिससे मानसिकता बैठ गई कि गौरवर्णी ही राजा होते हैं|
2. फिल्मों और विज्ञापनों में गोरी रंगत के लोगों को ज्यादा श्रेष्ठ और कामयाब दिखाने की परंपरा |

तो फिर कैसे बदले नजरिया? 

रंग को लेकर सुंदरता का जो पैमाना है उसे बदलना आसान नहीं है लेकिन कहीं ना कहीं से तो शुरुआत करनी पड़ेगी | और यह शुरुआत परिवार से ही हो | और परिवार में भी बच्चों से | बच्चों में शुरू से ही यह भावना विकसित करने की जरूरत है कि जो प्रतिभा संपन्न है |वह सुंदर है | जो अच्छा इंसान है | वह सुंदर सुंदर है | सुंदरता का रंग से कोई संबंध नहीं है | माता पिता को भी अपने बच्चों के सामने गोरी रंगत को कोई महत्व नहीं देना चाहिए | अपने बच्चों की त्वचा की रंगत में निखार की कतई कोशिश नही करना चाहिए| बल्कि त्वचा की सेहत पर ध्यान देना चाहिए| त्वचा की सुंदरता उसके अच्छे स्वास्थ्य पर निर्भर करती है ना कि त्वचा की रंगत पर | लेकिन अक्सर माताएं और बेटियां त्वचा की रंगत में निखार के लिए टिप्स खोजती रहती है इसी नजरिए को बदलने की जरूरत है क्योंकि यही मां और बेटियों से बच्चों का नजरिया गौरवर्ण की तरफ हो जाता है और फिर वह समाज का दृष्टिकोण बन जाता है |
विज्ञापनों और फिल्मों में सांवली और काली रंगत के लोगों को भी लाया जाना चाहिए जिससे सुंदरता को लेकर रंग के प्रतिमान बदल सकें|
हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है की कहीं भविष्य में सांवलापन या कालापन ही सुंदरता का पैमाना ना बन जाए क्योंकि यह भी गलत होगा क्योंकि सुंदरता को रंग के पैमाने पर मापा ही नहीं जाना चाहिए फिर वह श्वेत रंग का हो या अश्वेत |

असली सुंदरता के मायने

कहते हैं की सुंदरता तो, देखने वालों की आंखों में होती है| आंतरिक सुंदरता की बात अक्सर की जाती की जाती है| लेकिन सच तो यह है कि सदियों से हम सुंदरता को बाहरी चमक-दमक से ही मापते आए हैं | जब से गौरवर्ण को सुंदर माने जाने जाने लगा  है | सभी ने गोरा ही सुंदर है की विचारधारा को बढ़ाने का काम किया है | हमें इस सोच में बदलाव करने की जरूरत  है |
सुंदरता कभी भी आंतरिक सौंदर्य के बिना पूरी नहीं हो  सकती अच्छी वाणी और मन, सरल और शिष्ट व्यवहार,  ईमानदारी और स्वस्थ शरीर का सौम्य मिश्रण ही सुंदरता है|
सांवली रंगत के प्रसिद्ध भारतीय


श्वेत रंग  को  सुंदरता के प्रतीक, से हटाना क्यों  जरूरी है?


भारत में देखा जाए तो क्या यहाँ सिर्फ जातिभेद है, रंगभेद नहीं है। परंतु वास्तविकता कुछ और ही है, क्योंकि भारत भी रंगभेद से अछूता नहीं है। भारत में इसका अपना अलग ही स्वरूप है, क्योंकि लिंगभेद से जुड़कर यह और भयानक हो जाता है।भारतीय समाज में लड़कियों के लिये सांवला रंग किसी शारीरिक अपंगता जैसा ही बड़ा अभिशाप है।


सुंदर और गौरवर्णी त्वचा की दीवानगी को दर्शाते यह आंकड़े
1.  58000 करोड़ रुपए का स्किन केयर प्रोडक्ट का स्किन केयर प्रोडक्ट का मार्केट हैं | (2020 के मौजूदा अनुमानों के अनुसार भारत में) 
2.  73000 करोड़ रुपए का हो जाएगा स्किन केयर प्रोडक्ट का मार्केट भारत में 2023 तक |
3. 7.9% की वार्षिक बढ़ोतरी बढ़ोतरी के साथ बढ़ रहा है भारत का स्किन केयर प्रोडक्ट का बाजार |

 📝.... सौरभ रोहित

संदर्भ:-
1. शहनाज हुसैन ,अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सौंदर्य विशेषज्ञ |
2. कविता इम्मानुएल, फाउंडर डार्क इज ब्यूटीफुल कैंपेन|